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Disinvestment in Bank : सरकार ने सर्वजनिक क्षेत्र के बैंक इंडियन ओवरसीज बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाने का फैसला किया है. इसके तहत आज यानी 17 दिसंबर को बैंक में करीब 3 फीसदी हिस्सेदारी बेची जानी है.
सरकार ने इंडियन ओवरसीज बैंक में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर ली है. नई दिल्ली. सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) में 3 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है. यह बिक्री ओपन फॉर सेल के जरिये करने की तैयारी है. विनिवेश की यह प्रक्रिया बुधवार 17 दिसंबर से ही शुरू हो जाएगी. माना जा रहा है कि इस बिक्री से सरकार को कंपनी के मौजूदा शेयर बाजार पर करीब 2,100 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है.
शेयर बाजार में मंगलवार यानी 16 दिसंबर, को आईओबी के शेयरों की कीमत 1.08 फीसदी गिरावट के साथ 36.57 रुपये थी. आईओबी ने मंगलवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि सरकार मूल पेशकश के तहत 2 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर 38.51 करोड़ शेयर बेचेगी. इसके अलावा ‘ग्रीन शू’ विकल्प यानी अतिरिक्त बोली आने पर उसे रखने के तहत अतिरिक्त एक फीसदी हिस्सेदारी के बराबर 19.25 करोड़ शेयर भी बेचने का विकल्प रखा गया है. कुल मिलाकर यह बैंक की चुकता इक्विटी पूंजी का 3 फीसदी होगा.
कौन खरीद सकता है हिस्सेदारी
निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव अरुणिश चावला ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि आईओबी का ओएफएस बुधवार को गैर-खुदरा निवेशकों के लिए खुलेगा, जबकि खुदरा निवेशक बृहस्पतिवार को बोली लगा सकेंगे. फिलहाल चेन्नई स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 94.61 फीसदी है. इसका मतलब है कि हिस्सेदारी बेचने के बाद इस बैंक में सरकार का हिस्सा 91.61 फीसदी के आसपास पहुंच जाएगा.
बैंक कर्मचारियों को भी मिलेगा मौका
बैंक ने यह भी बताया कि ओएफएस के तहत 1.5 लाख शेयर (करीब 0.001 फीसदी हिस्सेदारी) पात्र कर्मचारियों के लिए आरक्षित किए जा सकते हैं. पात्र कर्मचारी सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी होने पर अधिकतम पांच लाख रुपये तक के शेयरों के लिए आवेदन कर सकेंगे. यह विनिवेश न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी नियमों के अनुरूप है, जिसके तहत सूचीबद्ध कंपनियों में कम-से-कम 25 फीसदी हिस्सेदारी आम जनता के पास होना अनिवार्य है.
और भी बैंकों में हिस्सा बेचेगी तैयार
पूंजी बाजार नियामक सेबी ने केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को इस नियम पर खरा उतरने के लिए अगस्त, 2026 तक की छूट दी है. आईओबी के अलावा पंजाब एंड सिंध बैंक, यूको बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में भी सरकार की हिस्सेदारी तय सीमा से अधिक है. लिहाजा सेबी के नियमों के तहत सरकार को इन बैंकों में भी अपनी हिस्सेदारी घटानी पड़ेगी और उसमें 25 फीसदी हिस्सा आम निवेशकों का होगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

