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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की पीएम जियोर्जिया मेलोनी की मुलाकात को लेकर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं. इस बैठक में इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) पर बड़ा फोकस रहने वाला है. माना जा रहा है कि यह कॉरिडोर चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और पाकिस्तान के सीपेक प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है. रेलवे, सड़क, पाइपलाइन और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़ा यह मेगा प्रोजेक्ट भारत, मिडिल ईस्ट और यूरोप के बीच व्यापारिक दूरी और लागत दोनों घटा देगा. इससे वैश्विक व्यापार का नक्शा बदलने की संभावना जताई जा रही है.
आईएमईसी आने के बाद दुनिया का कारोबारी नक्शा पूरी तरह से बदल जाएगा.
PM Modi Italy Visit: जब लगभग पूरी दुनिया अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध में उलझी हुई है, ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मेगा मिशन के साथ पांच देशों की यात्रा पर निकले हुए हैं. सबको हैरानी इस बात की भी है कि जब दुनिया के तमाम देश मिडिल ईस्ट संकट की वजह से चौपट हो रही खुद की अर्थव्यवस्था को बचाने में जुटे हैं, ऐसे वक्त में पीएम मोदी ने कल के बेहतर भारत के लिए यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन और नार्वे में जबरदस्त मास्टर स्ट्रोक खेला है. अब आज एक चैप्टर इटली की राजधानी रोम में भी लिखा जाना है. इस चैप्टर में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी चीन की बर्बादी की ऐसी इबारत लिखने जा रहे हैं, जिसे पढ़ने के बाद निश्चित तौर पर पाकिस्तान के तो फेफड़े ही बाहर आ जाएंगे.
जी हां, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी इस यात्रा के अंतिम पड़ाव इटली पहुंच चुके है. आज यहां पर कई अहम मसलों पर पीएम मोदी और मेलोनी के बीच बातचीत होने वाली है. इस बातचीत में एक मुद्दा ऐसा भी है, जिस पर सीधे तौर पर चीन और पाकिस्तान की जान अटकी हुई है. दरअसल, यहां पर हम बात कर रहे हैं इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) की. आईएमईसी सिर्फ एक व्यापारिक मार्ग नहीं है, बल्कि ऐसा सिल्क रूट है जो भारत, मिडिल-ईस्ट के बीच की साझेदारी को मजबूत करेगा. इस कॉरिडोर के तहत, रेलवे, सड़क मार्ग, एनर्जी पाइपलाइन और समुद्र के नीचे डिजिटल केबल बिछाए जाएंगे. इस प्रोजेक्ट के अस्तित्व में आते ही दुनिया का व्यापारिक नक्शा पूरी तरह से बदल जाएगा और चीन का प्रभुत्व पूरी तरह से खत्म हो जाएगा.
इस कॉरिडोर के आने से कैसे बदलेगा दुनिया का व्यापारिक नक्शा
- तीस फीसदी सस्ता होगा कारोबार: आईएमईसी कॉरिडोर के बनने के बाद माल ढुलाई का खर्चा 30 फीसदी तक कम हो जाएगा. यानी जिस सामान को भेजने में आज 100 रुपए लगते हैं, वह कल मात्र 70 रुपए में यूरोप पहुंच जाएगा. यह बचत कारोबारियों के मुनाफे में सीधा इजाफा करेगी. छोटे और मझोले कारोबारियों को इससे सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि उनके लिए लॉजिस्टिक्स लागत हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है. वहीं, कम लागत का मतलब है अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्रोडक्ट्स की कीमत कम होगी और कॉम्पिटिशन में इजाफा होगा.
- ट्रांसपोर्टेशन में 40 फीसदी कम लगेगा समय: आईएमईसी कॉरिडोर बनने के बाद सामान को एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाने में काफी कम समय लगेगा. अनुमान है कि अभी जो माल यूरोप या दूसरे बड़े बाजारों तक पहुंचने में करीब 40 दिन लेता है, वही भविष्य में लगभग 24 दिन में पहुंच सकेगा. इसका सबसे ज्यादा फायदा उन चीजों को होगा जो जल्दी खराब हो जाती हैं. इनमें फल, सब्जियां, फूल, दवाइयां और मेडिकल उपकरण शामिल हैं. कम समय में डिलीवरी होने से कारोबारियों का गोदाम और स्टोरेज खर्च भी घटेगा.
- एक तीर से कई निशाने लगाएगा यह कॉरिडोर: आईएमईसी कॉरिडोर को आधुनिक दौर का नया सिल्क रूट बताया है. फिलहाल, सिल्क रूट को चीन और यूरोप के बीच कारोबार का रास्ता माना जाता है. नया आईएमईसी कॉरिडोर उससे कहीं बड़ा और आधुनिक होगा. यह भारत को मिडिल ईस्ट, यूरोप और आगे अफ्रीका तक जोड़ेगा. यह केवल व्यापार का रास्ता नहीं होगा, बल्कि अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और लोगों को जोड़ने वाला एक मजबूत पुल बनेगा. इससे देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा और आर्थिक संबंध मजबूत होंगे.
- अफ्रीका तक जाएगी यह कनेक्टिविटी: आईएमईसी कॉरिडोर का दायरा सिर्फ भारत, मिडिल ईस्ट और यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका कनेक्शन अफ्रीका तक भी जाएगा. इस कॉरिडोर के जरिए भारतीय कंपनियों को अफ्रीका तक अपना सामान पहुंचाने में आसानी होगी और ट्रांसपोर्ट खर्च भी कम होगा. इससे भारत के इंडस्ट्री सेक्टर को नए कस्टमर्स और नए मार्केट्स मिलेंगे. एग्रीकल्चर, मेडिसिन, टेक्नोलॉजी और मशीनरी जैसे कई सेक्टर्स में भारत की पहुंच बढ़ सकती है. इससे दोनों क्षेत्रों के बीच ट्रेड और इन्वेस्टमेंट भी बढ़ेगा.
- रेल-सड़क, पाइपलाइन, केबल सब हैं इसमें: आईएमईसी कॉरिडोर सिर्फ एक साधारण ट्रेड रूट नहीं होगा, बल्कि यह कई मॉडर्न फैसिलिटीज को एक साथ जोड़ने वाला बड़ा प्रोजेक्ट होगा. इसके तहत रेलवे लाइंस बिछाई जाएंगी, नई रोड्स बनाई जाएंगी और एनर्जी सप्लाई के लिए पाइपलाइन भी डाली जाएंगी. इसके अलावा समुद्र के अंदर डिजिटल केबल बिछाकर इंटरनेट और डेटा कनेक्टिविटी को भी बेहतर किया जाएगा. यानी इस एक प्रोजेक्ट से कार्गो ट्रांसपोर्ट, पावर सप्लाई और डिजिटल नेटवर्क तीनों सेक्टर्स को फायदा मिलेगा. अलग-अलग प्रोजेक्ट्स बनाने के बजाय सबकुछ एक साथ होने से खर्च भी कम आएगा और काम तेजी से पूरा होगा.
- क्लीन एनर्जी पर है खास जोर: आईएमईसी कॉरिडोर में क्लीन और ग्रीन एनर्जी को खास अहमियत दी जा रही है. भारत पहले से ही सऊदी अरब, यूएई और सिंगापुर जैसे देशों के साथ क्लीन एनर्जी को लेकर बातचीत कर रहा है. इस प्रोजेक्ट के जरिए सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी एनवायरमेंट-फ्रेंडली एनर्जी का एक्सचेंज किया जाएगा. इसका सबसे बड़ा फायदा प्रदूषण कम होगा और सभी को क्लीन पावर मिल सकेगी. इससे भविष्य में एनर्जी के नए सोर्स डेवलप होंगे और फॉसिल फ्यूल पर डिपेंडेंसी भी कम हो सकती है.
- प्राइवेट सेक्टर्स की होगी अहम भागीदारी: बीते दिनों, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि इतने बड़े प्रोजेक्ट को सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. अगर सरकार अकेले इस काम को करेगी तो प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है और कॉस्ट भी बढ़ सकती है. इसलिए प्राइवेट कंपनियों को इसमें एक्टिव पार्टिसिपेशन करना होगा. प्राइवेट सेक्टर के पास मॉडर्न टेक्नोलॉजी, बेहतर मैनेजमेंट और मार्केट एक्सपीरियंस होता है. कंपनियां कम समय में ज्यादा इफेक्टिव सॉल्यूशंस निकाल सकती हैं. इसके अलावा प्राइवेट सेक्टर नई टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को तेजी से अपनाता है, जिससे प्रोजेक्ट की क्वालिटी बेहतर हो सकती है.
- डिजिटल पेमेंट होगा आसान: आईएमईसी कॉरिडोर में डिजिटल पेमेंट सिस्टम को भी मजबूत बनाने की योजना है. भारत के यूपीआई की तरह एक साझा डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म डेवपल किया जाएगा. इससे अलग-अलग देशों के बीच ट्रेड का पैसा तुरंत ट्रांसफर किया जा सकेगा. अभी इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन में काफी समय और बैंक चार्ज लगता है, लेकिन नई सिस्टम आने के बाद यह प्रॉसेस आसान और सस्ती हो जाएगी. भारत और यूएई के बीच पहले से ऐसा मॉडल इस्तेमाल किया जा रहा है. डिजिटल पेमेंट बढ़ने से पेपरवर्क कम होगा और ट्रांजैक्शन ज्यादा ट्रांसपेरेंट बनेंगे. इससे छोटे कारोबारियों को भी बड़ा फायदा मिलेगा और इंटरनेशनल ट्रेड पहले से कहीं ज्यादा तेज हो सकेगा.
- पैसे का इंतजाम कैसे होगा: आईएमईसी जैसे बड़े इंटरनेशनल प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए भारी इन्वेस्टमेंट की जरूरत होगी. इसके लिए कई ऑप्शंस सुझाए गए हैं. इनमें वर्ल्ड बैंक और दूसरी इंटरनेशनल एजेंसियों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ा जा सकता है. इसके अलावा ‘ग्रीन बॉन्ड’ और ‘आईएमईसी बॉन्ड’ जैसे नए इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट्स भी बनाए जा सकते हैं. इन बॉन्ड्स के जरिए दुनिया भर के इन्वेस्टर्स, बैंक और इंश्योरेंस कंपनियां पैसा लगा सकेंगी. इससे लंबे समय तक लगातार फंडिंग मिलती रहेगी और प्रोजेक्ट बीच में नहीं रुकेगा. यह तरीका कई बड़े देशों में सफल रहा है.
- भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम वाली सोच: इस प्रोजेक्ट को लेकर भारत का कहना है कि आईएमईसी कॉरिडोर किसी एक देश की ताकत दिखाने या दूसरे देशों पर दबाव बनाने के लिए नहीं है. यह प्रोजेक्ट आपसी कोऑपरेशन, ट्रस्ट और पार्टनरशिप की भावना पर आधारित है. भारत दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि बिना किसी दबदबे के भी बड़े और सफल प्रोजेक्ट तैयार किए जा सकते हैं. ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, इसी सोच के साथ भारत इस कॉरिडोर पर काम कर रहा है. इसमें हर देश की सॉवरेनिटी और इंटरेस्ट्स का सम्मान किया जाएगा. भारत खुद को एक भरोसेमंद पार्टनर के रूप में पेश करना चाहता है, जो सभी देशों को साथ लेकर आगे बढ़ने में विश्वास रखता है.
यह कॉरिडोर कैसे लिखेंगा चीन की बर्बादी की इबारत और क्यों परेशान है पाकिस्तान?
इस प्रोजेक्ट को लेक चीन और पाकिस्तान की जान इसलिए अटकी है, क्योंकि आईएमईसी सीधे तौर पर चीन-पाकिस्तान कॉमर्शियल कॉरिडोर (सीपेक) के अस्तित्व को खत्म करने वाला है. भारत का आईएमईसी पाकिस्तान को पूरी तरह बाईपास करता है. अगर भारत-यूएई-सऊदी-यूरोप का यह समुद्री-रेल गलियारा बन गया, तो चीन का ग्वादर बंदरगाह और पाकिस्तान का ट्रांजिट ख़त्म हो जाएगा. इसके अलावा, यह कॉरिडोर पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान से नहीं गुजरता, जिससे भारत की टेरिटोरियल इंट्रीगिटी वाली शर्त पूरी होती है.
क्या यह कॉरिडोर चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का विकल्प है?
एक्सपर्ट्स की मानें तो इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर को चीन के बीआरआई के सीधे विकल्प के रूप में डिजाइन किया गया है. चीन के दबदबे वाला बीआरआई पाकिस्तान होते हुए सड़क के रास्ते गुजरता है. वहीं पाकिस्तान को पूरी तरह बाईपास करते हुए आईएमईसी भारत, अरब, इज़राइल और यूरोप को जोड़ता है. आईएमईसी के पीछे अमेरिका और यूरोप का समर्थन है. आईएमईसी के अस्तित्व में आने के बाद चीन के ग्वादर बंदरगाह और सीपेक का सामरिक महत्व घट जाएगा. इससे चीन के स्ट्रेट ऑफ मलक्का पर निर्भरता भी खत्म हो जाएगी.
यह कॉरिडोर किन-किन देशों से होकर गुजरेगा? क्या इसमें अफ्रीका को भी शामिल किया गया है?
फिलहाल इस कॉरिडोर में भारत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन, इजराइल और यूरोपीय संघ के देश शामिल हैं. लेकिन यह कॉरिडोर मिडिल ईस्ट के रास्ते अफ्रीका तक भी पहुंच सकता है. भविष्य में अफ्रीकी देश भी इस कॉरिडोर के दायरे में आ सकते हैं. अफ्रीका में प्राकृतिक संसाधनों और युवा आबादी की कोई कमी नहीं है. वहां के बाजार भारत के लिए बहुत बड़े अवसर पैदा कर सकते हैं.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें

