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Mango Farming: एक अनपढ़ किसान की दूरदर्शिता आज पूरे परिवार के लिए सफलता की मिसाल बन गई है. करीब 40 वर्ष पहले उन्होंने खेत की मेड़ पर 200 कैरी (आम) के पौधे लगाए थे. समय के साथ यही पौधे घने बाग में बदल गए और अब हर साल लगभग 15 लाख रुपये की आय का मजबूत स्रोत बन चुके हैं. इस बाग से पीढ़ियों को आर्थिक संबल मिला है और परिवार की आजीविका सशक्त हुई है. यह सफलता बताती है कि सही योजना, धैर्य और दीर्घकालिक सोच के साथ बागवानी किसानों के लिए स्थायी और लाभदायक आय का बेहतरीन माध्यम बन सकती है.
अक्सर लोग खेती में हर सीजन नई फसल बोकर कमाई की उम्मीद करते हैं, लेकिन करौली जिले के अटा गांव में एक अनपढ़ किसान की 40 साल पुरानी सोच आज उसकी आने वाली पीढ़ियों की किस्मत बदल रही है. करीब चार दशक पहले स्वर्गीय शंकरलाल सैनी ने अपनी 35 बीघा जमीन की मेड़ और चारों ओर 200 कैरी (आम) के पौधे लगाए थे.
उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह फैसला एक दिन परिवार के लिए ऐसा “बिजनेस मॉडल” बन जाएगा, जिससे बिना खेती किए हर साल करीब 15 लाख रुपये तक की आमदनी होगी. आज पिता के निधन के बाद यही पेड़ बेटों के लिए स्थायी कमाई का जरिया बने हुए हैं. इतना ही नहीं, गर्मियों के मौसम में यह बाग दर्जनों लोगों को रोजगार देने के साथ-साथ पूरे गांव को हरियाली और घनी छाया भी दे रहा है.
स्वर्गीय शंकरलाल सैनी के पुत्र रामस्वरूप सैनी बताते हैं कि उनके पिता ने करीब 40 वर्ष पहले 200 कैरी के पौधे लगाए थे. उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि यह पेड़ एक दिन परिवार की आर्थिक रीढ़ बन जाएंगे. वर्षों तक इन पेड़ों की देखभाल की गई और आज ये विशाल वृक्ष हर साल हजारों क्विंटल कैरी देकर परिवार की अच्छी-खासी आय का आधार बन चुके हैं. अब परिवार को हर सीजन फसल पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती.
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रामस्वरूप बताते हैं कि गर्मियों में बाग की कैरी की मांग इतनी अधिक रहती है कि व्यापारी खुद बाग तक पहुंच जाते हैं. अचार बनाने के लिए यहां की कैरी बेहद पसंद की जाती है. करौली, हिंडौन, गंगापुर सहित आसपास के जिलों से व्यापारी कैरी खरीदने आते हैं. केवल कैरी की बिक्री से ही परिवार को हर साल करीब 15 लाख रुपये तक की आय हो जाती है. यही वजह है कि पिता की दूरदर्शिता आज बेटों के लिए स्थायी कमाई का जरिया बन गई है.
कैरी तोड़ने, छंटाई, पैकिंग और लोडिंग जैसे कार्यों में गर्मी के पूरे सीजन के दौरान गांव के कई लोगों को रोजगार मिलता है. एक बाग केवल परिवार की आय का साधन नहीं बना, बल्कि ग्रामीणों के लिए भी रोजगार का स्रोत बन गया है.
स्थानीय निवासी दीपक सैनी बताते हैं कि अटा गांव की कैरी का अचार दूर-दूर तक मशहूर है. स्वाद और गुणवत्ता के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि इस बाग की पहचान अब केवल गांव तक सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास के कई जिलों तक पहुंच चुकी है.

